अगर आप अंग्रेजी साहित्य की समझ रखते हैं तो आप जानते होंगे कि रोमांटिक होने का मतलब रोमांटिक होना ही है..ज्यादातर लोग रोमांस,प्यार और सेक्स सबको एक ही चीज़ समझ लेते हैं! जबकि तीनों अलग-अलग बातें हैं! मेरी कई बार इस विषय पर बहस हो चुकी है..देवानंद साहब की एक किताब है "रोमांसिंग विद लाइफ" तो ये रोमांस जीवन और प्रकृति से लेकर व्यक्ति विशेष/सोलमेट से भी संभव है..प्यार की बात करें तो ये कैरियर, लड़की, दोस्त सबसे रहता/होता है.. आप क्या कहते हैं? अगर आप चाहेंगे तो मैं इस पर विस्तार से लिखूंगा..ये मेरे पसंदीदा विषयों में से एक है..
No comments:
Post a Comment